थोडीसी उम्र कटाकर ऐ जिंदगी हमने राज कई देखे
काले धुए मे लिपटे कुछ कल कुछ आज कई देखे
न
थी खबर फितरते सुरत की जमाने तेरी
दुनिया मे रहकर हमने हमने नकाबपोश्त चेहरे कई देखै
बाजी
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पानिपत काव्य
प्रलयलोटला सागर उठला खणाणल्या समशेरी महाभारतासम रण दिसले कुरुक्षेत्राची भुमी भाऊ सदाशिव रणात तांडव काळाग्निसम करीत भिडले शिंद्याचे रण भैरव ...
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सोडलास हात जेवा गेलीस निघुन अशी बोलवलं ही असत परत पण वाटलं वेळ गेली होती रंगलो होतो सुखस्वप्नात बागडत होतो स्व छंदात मोडुन सुखाची झोप ...
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देवल गिरावते फिरावते निसान अली ऐसे लबके राव राने सबकी गये लबकी गौरा गणपती आये औरन को देत ताप अपनी ही बारी सब मारी गये दबकी पिरा पैगंबरा ...
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क्या आप मानते है कि रावण एक महान राजा था ? क्या आपको लगता है कि रावण सर्व शक्तीशाली योद्धा था ? और उसको कौई हरा नही पाया था? क्या आपको यह लग...
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