औकात भुल गये है कुत्ते
.............. छेड रहै है शेरो को
निकली है गिद्धोंकी टोली
.............. सताने कुछ बांजोंको
ज्ञात है हमको आप उसी
.................... घुरी की संतान है
पृथ्वीराज है बसा इस दिल मे
....................कश्मिर हमारी शान है
वही एक गलती हर बार मुआफी
...................अब नसिब ना होनी है
सुन ले पाकी कब्र तुम्हारी हमे वाही बनानी है
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,,,,,,,,,,,,,,,,,#बाजी©
Sunday, 25 December 2016
सुन ले पाकी
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पानिपत काव्य
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