रो रही है धरती याद मे अपने बेटो की
मिट गये देशधरम पर वही
,,.............सुखदेवभगत सिंग की
बदल गया ना काल थोडासा
............. क्या भुल गये हम इनको
त्याग सिख ना पाये इनसे
क्यो कहते हो वंशज इनकी।।
#बाजी
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पानिपत काव्य
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