..जाग उठा था हिंदुराष्ट्र
जुल्म सह के सालोसाल
सहीष्णुता की विफलता को
.......वह समझा था सालोबाद
आत्मघात है यह धरम के लिये
......... राख्यो रे थोडी लाज
हिंदुस्थान हमारा है
.........हर हिंदु था भाई आज
आयोद्ध्यामे बसा प्रभु
,,......देख रहा था राह आज
इतीहास बदला रे हमने
.......आज सहीष्णुता छोड ही दी
औकात भुल गये थे कुत्ते
........ लाथ मारणा जरुरी था
बाबरी ढह गयी थी
.......आज अयोध्या मुक्त हुई
.हिंदु नाम पर एक हुये हम
.......... इतीहास था बनाया आज......
#बाजी
Wednesday, 28 December 2016
जाग उठा हिंदुराष्ट्र
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पानिपत काव्य
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