हम गैरो को अपना समझे
यह गलती नही हमारी है
हर गैरो मे तु नजर आये
यह दिल की दिवानगी है
मत समझ परवाना हमे
हम जल न सकेंगे तेरे लिये
एक तमन्ना बसि है दिल मे
जिना ही है तेरे लिये
जिंदगी कि हर कदम पर
एहसास यह होता रहा है
दिल तो बनाया रेखाओ से
अब रंग बता भरना कहा है
#बाजी©
Wednesday, 28 December 2016
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पानिपत काव्य
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